वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत

लेव वाइगोत्स्की द्वारा प्रतिपादित सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि बालक का सीखना और संज्ञानात्मक विकास केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं होता, बल्कि यह समाज, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया से गहराई से जुड़ा होता है। वाइगोत्स्की के अनुसार ज्ञान का निर्माण पहले सामाजिक स्तर पर होता है और बाद में वह व्यक्तिगत स्तर पर विकसित होता है।
इस सिद्धांत में भाषा को सोच का प्रमुख साधन माना गया है। Zone of Proximal Development (ZPD) और Scaffolding जैसी अवधारणाएँ यह बताती हैं कि बालक अधिक सक्षम व्यक्तियों—जैसे शिक्षक, अभिभावक या सहपाठी—की सहायता से अपनी क्षमता को और अधिक विकसित कर सकता है। इसलिए शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित न होकर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने की होती है।
नीचे दिए गए 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत की मूल अवधारणाओं को समझने, पुनरावृत्ति करने तथा CTET, UPTET, B.Ed., D.El.Ed. एवं शिक्षक-प्रशिक्षण परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं।