वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत

वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Vygotsky Theory) बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वाइगोत्स्की के अनुसार बच्चे का विकास केवल व्यक्तिगत अनुभवों से नहीं होता, बल्कि सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction), भाषा (Language) और संस्कृति (Culture) के माध्यम से होता है। इस सिद्धांत में ZPD (निकटस्थ विकास क्षेत्र / Zone of Proximal Development) बच्चों की वह क्षमता दर्शाता है जिसे वे अकेले नहीं कर सकते, लेकिन किसी अधिक जानकार व्यक्ति (MKO – More Knowledgeable Other) की मदद से पूरा कर सकते हैं। इसी प्रक्रिया में स्कैफोल्डिंग (Scaffolding) का महत्व आता है, जहाँ शिक्षक या मार्गदर्शक बच्चों को अस्थायी सहायता प्रदान करते हैं ताकि वे कठिन कार्य सीख सकें और धीरे-धीरे स्वतंत्र हो जाएँ। वाइगोत्स्की ने यह भी बताया कि बच्चों की निजी भाषा (Private Speech) उनके सोचने और समस्या सुलझाने की क्षमता को विकसित करने में सहायक होती है। CTET और अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में वाइगोत्स्की का यह सिद्धांत बच्चों के सीखने के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं, सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और भाषा के प्रयोग पर आधारित प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।

वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत

वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक अधिगम सिद्धांत

lev vygotsky

lev vygotsky

Soviet psychologist

Born: Lev Simkhovich Vygotsky · November 17 [O.S. November 5] 1896 · Orsha, Mogilev Governorate, Russian Empire (now Belarus)

Died: June 11, 1934 (aged 37) · Moscow, Russian SFSR, Soviet Union

Alma mater: Imperial Moscow University · Shanyavsky Moscow City People’s University

Spouse: Roza Smekhova (m. 1924)

Known for: Cultural-historical psychology, zone of proximal development, inner speech

Fields: Psychology

मुख्य बिंदु

  • सामाजिक संदर्भ की भूमिका: वाइगोत्स्की के अनुसार, अधिगम और विकास को सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों से अलग नहीं किया जा सकता। बच्चे अपने परिवेश, परिवार, शिक्षक और साथियों से सीखते हैं।
  • भाषा का महत्व: भाषा केवल संचार का साधन नहीं है, बल्कि सोच और अधिगम का आधार है।
  • Zone of Proximal Development (ZPD): यह वह क्षेत्र है जहाँ बच्चा अकेले कार्य नहीं कर सकता, लेकिन मार्गदर्शन और सहयोग से कर सकता है।
  • Scaffolding (सहारा देना): शिक्षक या वयस्क बच्चे को अस्थायी सहारा देते हैं ताकि वह धीरे-धीरे स्वतंत्र रूप से कार्य करना सीख सके।
  • संस्कृति का प्रभाव: हर समाज की परंपराएँ, मान्यताएँ और उपकरण बच्चे के सीखने की प्रक्रिया को आकार देते हैं।

स्तरों की व्याख्या

अवधारणाविवरणशैक्षिक महत्व
ZPDसंभावित विकास का क्षेत्रशिक्षक को यह समझने में मदद करता है कि बच्चे को कहाँ मार्गदर्शन चाहिए
Scaffoldingअस्थायी सहाराधीरे-धीरे बच्चे को स्वतंत्रता की ओर ले जाता है
भाषासोच और अधिगम का साधनसंवाद और चर्चा से सीखने को गहरा करता है
संस्कृतिसीखने का संदर्भबच्चे की सोच और व्यवहार को प्रभावित करती है
वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत

वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, बच्चों का संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) केवल व्यक्तिगत अनुभवों से नहीं होता, बल्कि समाज और संस्कृति के साथ संवाद (Social Interaction & Culture) के माध्यम से होता है। वाइगोत्स्की ने यह बताया कि बच्चे सीखने की प्रक्रिया में दूसरों की मदद से अधिक सक्षम बनते हैं और भाषा, निजी भाषण (Private Speech) और सहयोगपूर्ण शिक्षा (Collaborative Learning) इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

लिव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky, 1896–1934) एक प्रसिद्ध रूसी मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने बालकों के सीखने और विकास को समझाने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत प्रस्तुत किया। यह सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास अकेले नहीं होता, बल्कि समाज, भाषा और संस्कृति के सहयोग से होता है।

वायगोत्स्की का मानना था कि बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, जो उसे परिवार, विद्यालय, शिक्षक और समाज से प्राप्त होता है। इसी कारण उनके सिद्धांत को मनोविज्ञान में अधिगम का सिद्धांत (Theory of Learning) भी कहा जाता है।
वायगोत्स्की को संरचनावादी (Constructivist) विचारधारा का समर्थक माना जाता है।


वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Vygotsky Social Cultural Theory)

लिव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky, 1896–1934) एक प्रसिद्ध रूसी मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने बालकों के सीखने और विकास को समझाने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत प्रस्तुत किया। यह सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास अकेले नहीं होता, बल्कि समाज, भाषा और संस्कृति के सहयोग से होता है।

वायगोत्स्की का मानना था कि बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, जो उसे परिवार, विद्यालय, शिक्षक और समाज से प्राप्त होता है। इसी कारण उनके सिद्धांत को मनोविज्ञान में अधिगम का सिद्धांत (Theory of Learning) भी कहा जाता है।
वायगोत्स्की को संरचनावादी (Constructivist) विचारधारा का समर्थक माना जाता है।

यह सिद्धांत CTET, UPTET, UTET, KVS, NVS जैसी शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


वायगोत्स्की का मूल दृष्टिकोण

जहाँ पियाजे संज्ञानात्मक विकास को आयु और व्यक्तिगत खोज से जोड़ते हैं, वहीं वायगोत्स्की विकास का आधार सामाजिक वातावरण और सांस्कृतिक अनुभव को मानते हैं।

वायगोत्स्की के अनुसार:

  • बच्चा समाज में रहकर अनुकरण (Imitation) के माध्यम से सीखता है
  • विकास की प्रक्रिया सामाजिक अंतःक्रिया से शुरू होती है
  • भाषा सोचने का एक महत्वपूर्ण उपकरण (Tool) है

उनका पूरा सिद्धांत मुख्य रूप से तीन आधारों पर टिका है:

  1. सामाजिक अंतःक्रिया
  2. भाषा
  3. संस्कृति

संज्ञानात्मक विकास के तीन प्रमुख आधार

1. सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction)

वायगोत्स्की के अनुसार बच्चा दूसरों के साथ बातचीत करके सीखता है। माता-पिता, शिक्षक और सहपाठी बच्चे को सही दिशा दिखाते हैं। सामाजिक संपर्क के बिना संज्ञानात्मक विकास संभव नहीं है।


2. भाषा (Language)

वायगोत्स्की भाषा को सोच और सीखने का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हैं।
उनके अनुसार:

“भाषा के बिना संज्ञानात्मक विकास अधूरा है।”

भाषा बच्चे को समाज से जोड़ती है और उसके विचारों को व्यवस्थित करने में मदद करती है।


3. संस्कृति (Culture)

संस्कृति बच्चे को नैतिक मूल्य, व्यवहार और सामाजिक नियम सिखाती है। बच्चा अपने आसपास के लोगों को देखकर, सुनकर और उनकी नकल करके सांस्कृतिक व्यवहार सीखता है।


वायगोत्स्की के प्रमुख संप्रत्यय

1. निकटवर्ती विकास का क्षेत्र (Zone of Proximal Development – ZPD)

ZPD वह अवस्था है जहाँ बच्चा:

  • अकेले कार्य नहीं कर सकता
  • लेकिन किसी जानकार व्यक्ति की मदद से सीख सकता है

यहीं पर सीखने की अधिकतम संभावना होती है।

उदाहरण:
बच्चा घर पर बहुत कुछ सीख लेता है, लेकिन कठिन विषयों को समझने के लिए उसे शिक्षक या मित्र की सहायता की आवश्यकता होती है — यही ZPD है।

परिभाषा:
ZPD वह क्षेत्र है जिसमें बच्चा अकेले किसी कार्य को नहीं कर सकता, लेकिन किसी अधिक जानकार व्यक्ति (MKO) की मदद से उसे पूरा कर सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • ZPD बच्चे की संभावित सीखने की क्षमता को दर्शाता है।
  • यह वह अंतर है: वास्तविक क्षमता (Actual Development Level) और संभावित क्षमता (Potential Development Level)
  • अधिगम तभी अधिकतम होता है जब बच्चे को सही दिशा-निर्देश और सहायता मिलती है।

संबंध:
ZPD → MKO और Scaffolding के माध्यम से कार्य करता है।

उदाहरण:
अगर बच्चा अकेले जटिल गणित का सवाल हल नहीं कर सकता, तो शिक्षक की मदद से वह उसे हल कर सकता है।


2. अधिक जानकार अन्य (More Knowledgeable Other – MKO)

MKO वह व्यक्ति होता है जिसके पास बच्चे से अधिक ज्ञान या अनुभव होता है, जैसे:

  • शिक्षक
  • माता-पिता
  • बड़ा भाई-बहन
  • सहपाठी या डिजिटल माध्यम

बिना MKO के प्रभावी अधिगम संभव नहीं होता।

परिभाषा:
MKO वह व्यक्ति है जिसके पास सीखने वाले बच्चे से अधिक ज्ञान, अनुभव या कौशल होता है।

मुख्य बिंदु:

  • MKO सिर्फ शिक्षक नहीं हो सकता, बल्कि माता-पिता, साथी, बड़ा भाई/बहन या डिजिटल उपकरण भी हो सकते हैं।
  • MKO बच्चे को सही दिशा-निर्देश, संकेत और मार्गदर्शन देता है।
  • MKO की उपस्थिति ZPD में सीखने की प्रक्रिया को सफल बनाती है।

Flow / Arrow:
MKO → ZPD (“ZPD में मार्गदर्शन प्रदान करता है”)

उदाहरण:
शिक्षक बच्चे को जटिल समस्या हल करने के लिए संकेत देता है और बच्चे को सटीक समाधान तक पहुँचने में मदद करता है।


3. स्कैफोल्डिंग (Scaffolding)

स्कैफोल्डिंग का अर्थ है अस्थायी सहायता
शुरुआत में शिक्षक अधिक मदद करता है, फिर धीरे-धीरे सहायता कम कर देता है ताकि बच्चा स्वतंत्र रूप से सीख सके

इसे सीखने की “सीढ़ी” भी कहा जा सकता है।

परिभाषा:
Scaffolding वह अस्थायी सहायता है जो MKO बच्चे को ZPD में कार्य पूरा करने के लिए प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु:

  • बच्चों को धीरे-धीरे जटिल कार्य करने की क्षमता देना।
  • सहायता जैसे संकेत, मार्गदर्शन, उदाहरण या चरण-दर-चरण मदद।
  • जैसे-जैसे बच्चा आत्मनिर्भर होता है, सहायता धीरे-धीरे हटा दी जाती है।

Flow / Arrow:
Scaffolding → बच्चा (“ZPD में कार्य करने में मदद करता है”)

उदाहरण:
शिक्षक गणित का उदाहरण पहले दिखाता है, फिर बच्चा खुद से हल करने की कोशिश करता है।


4️⃣ निजी भाषण (Private Speech)

परिभाषा:
Private Speech वह प्रक्रिया है जिसमें बच्चा खुद से बात करके अपनी सोच और व्यवहार को नियंत्रित करता है

मुख्य बिंदु:

  • बच्चा समस्या हल करते समय खुद से निर्देश देता है।
  • सोचने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करता है।
  • यह बाद में अंतरात्मा (Inner Speech) में बदल जाता है।

Flow / Arrow:
बच्चा → Private Speech (“सोच और व्यवहार को व्यवस्थित करता है”)

उदाहरण:
एक बच्चा खिलौनों को क्रमबद्ध करते हुए बोलता है:
“पहले यह ब्लॉक यहाँ, फिर यह ब्लॉक वहाँ…”
यह उसकी Private Speech है, जो सोच और समस्या हल करने में मदद करती है।

वायगोत्स्की सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ

  1. संज्ञानात्मक विकास में समाज और संस्कृति की प्रमुख भूमिका
  2. विकास से पहले अधिगम होता है
  3. बालक में क्षमताएँ पहले से होती हैं, उन्हें बाहर लाने का कार्य समाज करता है
  4. भाषा, सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति को अत्यधिक महत्व
  5. ZPD, MKO और Scaffolding को अधिगम का आधार माना गया

पियाजे और वायगोत्स्की में अंतर

  • वायगोत्स्की सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव को महत्व देते हैं, पियाजे आयु को
  • वायगोत्स्की मार्गदर्शन आधारित अधिगम मानते हैं, पियाजे आत्म-अन्वेषण आधारित
  • वायगोत्स्की के अनुसार सीखना पहले होता है, पियाजे के अनुसार विकास पहले

शिक्षा में वायगोत्स्की सिद्धांत की भूमिका

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में यह सिद्धांत अत्यंत उपयोगी है।
यह:

  • सहयोगात्मक शिक्षण को बढ़ावा देता है
  • कठिन विषयों को सरल बनाता है
  • शिक्षक को मार्गदर्शक की भूमिका देता है
  • छात्रों के नैतिक और सामाजिक विकास में सहायक है


🧠 वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Vygotsky Socio-Cultural Theory)


🔷 वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक अधिगम सिद्धांत
– Quick Visual Notes


🔷 वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक अधिगम सिद्धांत

मुख्य विचार (Core Idea)
अधिगम अकेले नहीं होता।
संज्ञानात्मक विकास सामाजिक अंतःक्रिया, भाषा और संस्कृति के माध्यम से होता है।


🔷 वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक अधिगम सिद्धांत

सामाजिक वातावरण (Social Environment)

दूसरों के साथ अंतःक्रिया (Interaction with Others)

भाषा का उपयोग (Language Use)

सोच और तर्क (Thinking & Reasoning)

संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development)


🔷 तीन मुख्य स्तंभ (Three Main Pillars )

1️⃣ सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction)

  • सीखना अंतःक्रिया के माध्यम से होता है
  • माता-पिता, शिक्षक, सहपाठी बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं
  • ज्ञान सामाजिक रूप से निर्मित होता है

2️⃣ भाषा (Language)

  • भाषा सोचने का उपकरण है
  • योजना बनाने, तर्क और समस्या सुलझाने में मदद करती है
  • विचारों को समाज से जोड़ती है

3️⃣ संस्कृति (Culture)

  • संस्कृति सोचने के पैटर्न को आकार देती है
  • मूल्य, विश्वास और व्यवहार सिखाती है
  • सीखना अनुकरण के माध्यम से होता है

🔷 प्रमुख अवधारणाएँ (Key Concepts / Highlight Section)

मुख्य बिंदु (Key Points):

  1. सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Sociocultural Theory):
    वाइगोत्स्की का मानना था कि बच्चे समाज और संस्कृति के साथ अंतःक्रिया (Interaction) के माध्यम से सीखते हैं। इस प्रक्रिया में बड़े या अधिक जानकार व्यक्ति (MKO – More Knowledgeable Other) मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  2. भाषा और विचार (Language & Thought):
    भाषा सीखने और सोचने-समझने (Cognition) का महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चे स्वयं से बातें करते हुए (Private Speech) अपनी समस्याओं को हल करते हैं और व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
  3. निकटस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD – Zone of Proximal Development):
    यह वह क्षेत्र है जहाँ बच्चा अकेले कार्य नहीं कर सकता, लेकिन किसी अधिक जानकार व्यक्ति की मदद से सीख सकता है। ZPD बच्चे की सीखने की क्षमता और विकास की संभावना को दर्शाता है।
  4. स्कैफोल्डिंग (Scaffolding):
    यह MKO द्वारा दी जाने वाली अस्थायी सहायता है, जैसे संकेत, मार्गदर्शन या हल्की मदद, ताकि बच्चा कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सके।
  5. निजी भाषण (Private Speech):
    बच्चे खुद से बात करते हैं, जैसे, “पहले यह ब्लॉक यहाँ रखूँगा, फिर यह वाला…” यह उनकी सोच को व्यवस्थित करने और समस्या समाधान में मदद करता है।

📌 निकटस्थ विकास क्षेत्र (ZPD – Zone of Proximal Development)

परिभाषा:
वह अंतर जो बच्चा अकेले नहीं कर सकता और मदद से कर सकता है।

सबसे उत्तम अधिगम क्षेत्र


📌 अधिक जानकार व्यक्ति (MKO – More Knowledgeable Other)

MKO कौन हो सकता है?

  • शिक्षक
  • माता-पिता
  • सहपाठी
  • बड़ा भाई/बहन
  • डिजिटल उपकरण

शर्त:
MKO का ज्ञान सीखने वाले से अधिक होना चाहिए


📌 ढांचा (Scaffolding)

अर्थ: MKO द्वारा दी गई अस्थायी सहायता

  • संकेत (Hints)
  • मार्गदर्शन (Guidance)
  • क्रमबद्ध सहायता (Step-by-step help)

➡ सहायता धीरे-धीरे हटाई जाती है
➡ बच्चा स्वतंत्र बनता है


🔷 अधिगम अनुक्रम

MKO द्वारा मार्गदर्शन

ZPD में अधिगम

Scaffolding सहायता

स्वतंत्र प्रदर्शन (Independent Performance)


🔷 निजी भाषा (Private Speech – CTET के लिए महत्वपूर्ण)

निजी भाषा (Self-Talk / Private Speech)

  • बच्चा समस्या हल करते समय खुद से बात करता है
  • आत्म-नियमन में मदद करती है
  • वाइगोत्स्की इसे सकारात्मक और आवश्यक मानते हैं

➡ बाद में यह अंतरात्मा में बदल जाती है (Inner Speech)


🔷 वाइगोत्स्की बनाम पियाजे (Comparison Box)

वाइगोत्स्की (Vygotsky)पियाजे (Piaget)
सामाजिक अधिगम (Social Learning)व्यक्तिगत अधिगम (Individual Learning)
अधिगम विकास से पहले (Learning before Development)विकास अधिगम से पहले (Development before Learning)
संस्कृति और भाषा महत्वपूर्ण (Culture & Language Important)आयु और चरण महत्वपूर्ण (Age & Stages Important)

🔷 शिक्षा में भूमिका (Role in Education)

✔ सहयोगात्मक अधिगम (Cooperative Learning)
✔ समूह कार्य (Group Work)
✔ सहपाठी शिक्षण (Peer Tutoring)
✔ शिक्षक मार्गदर्शक के रूप में (Teacher as Facilitator)
✔ निर्देशित अधिगम (Guided Learning)


🔷 One-Line Revision

“वाइगोत्स्की के अनुसार, सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से अधिगम, विकास को आगे बढ़ाता है।”


निष्कर्ष (Conclusion)भाषा और विचार का संबंध (Language & Thought)

वायगोत्स्की के अनुसार भाषा सोचने की कुंजी है। भाषा तीन चरणों में विकसित होती है:

चरणविवरणउदाहरण
सामाजिक भाषा (Social Speech)दूसरों से बातचीतमाँ से बात करना
निजी भाषा (Private Speech)खुद से जोर-जोर से बोलना“यह ब्लॉक यहाँ रखूँगा…”
आंतरिक भाषा (Inner Speech)मन में बोलनास्वयं से सोचना

निजी भाषा का महत्व: बच्चा समस्याएँ सुलझाने और व्यवहार नियंत्रित करने के लिए खुद से बोलता है।

वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि सीखना एक सामाजिक प्रक्रिया है। बच्चे का संज्ञानात्मक विकास समाज, भाषा और संस्कृति के सहयोग से होता है। यह सिद्धांत शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यवहारिक है।


अन्य सिद्धांतों से तुलना (CTET के लिए जरूरी)

विशेषतावायगोत्स्कीपियाजे
विकास का आधारसामाजिक संपर्कव्यक्तिगत अनुभव
भाषा की भूमिकामहत्वपूर्णमाध्यमिक
शिक्षक की भूमिकासक्रिय (MKO)पर्यवेक्षक
ZPDहैनहीं

वास्तविक जीवन उदाहरण

उदाहरण 1: 5 साल का बच्चा खिलौनों से खेलते हुए बोलता है: “पहले यह लाल ब्लॉक यहाँ रखूँगा, फिर नीला वाला ऊपर… नहीं, यह भारी है, नीचे रखूँगा!” यह निजी भाषा है जो समस्या समाधान में मदद करती है।

उदाहरण 2: कक्षा में शिक्षक पहेली सुलझाने को कहता है। बच्चा अकेले नहीं सुलझा पाता। शिक्षक संकेत देता है: “पहले कोनों वाले टुकड़े ढूँढो।” बच्चा सुलझा लेता है। यह ZPD + स्कैफोल्डिंग है।

वाइगोत्सकी का भाषा पर विचार (Vygotsky Theory Feature)

वाइगोत्सकी के अनुसार भाषा (Language) और चिंतन (Thought) शुरुआत में अलग-अलग होते हैं, लेकिन समय के साथ ये एक-दूसरे के साथ जुड़ जाते हैं। उनका मानना था कि भाषा पहले आती है और विचार बाद में विकसित होते हैं, जिससे बालक का संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सुगम होता है।

वाइगोत्सकी ने बालक के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास (Social-Cultural Development) में भाषा को महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके अनुसार, विकास से पहले अधिगम (Learning before Development) होना जरूरी है। बालक की संज्ञानात्मक क्षमताएँ सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction), भाषा और संस्कृति (Culture) के माध्यम से बढ़ती हैं।

उन्होंने जोर दिया कि बालक अपने ज्ञान का सृजन (Knowledge Construction) स्वयं करता है, लेकिन यह प्रक्रिया तब अधिक प्रभावी होती है जब उसे सामाजिक और सांस्कृतिक मार्गदर्शन प्राप्त हो। वाइगोत्सकी का यह दृष्टिकोण शिक्षा और कक्षा प्रबंधन (Classroom Learning & Management) में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बच्चों को सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और समूह कार्य (Group Work) के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करता है।

इस प्रकार, भाषा व संज्ञानात्मक विकास का गहरा संबंध वाइगोत्सकी के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Sociocultural Theory) में निहित है।

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Vygotsky Quiz – 50 MCQs

🇷🇺 लेव वाइगोत्स्की: सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (50 MCQs)

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